Competent women also beat husbands
- Inquire India

- Nov 17, 2018
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महिलाएं कई तरह की हिंसा का शिकार होती हैं, लेकिन घरेलू हिंसा एक ऐसा मुद्दा है, जो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा। वडोदरा के एक एनजीओ ‘सहज’ ने एक सर्वे किया, जिसके नतीजों में सामने आया कि देश में हर तीसरी महिला अपने पति के हाथों पिटती है।

बचपन में एक गाना सुना था… ‘भला है बुरा है जैसा भी है, मेरा पति मेरा देवता है’। तब इस गाने का मतलब कुछ खास समझ नहीं आता था, लेकिन अब समझ आता है कि वह गाना निहायत ही घटिया था। पुरुषों के अंदर मर्द होने का एक अलग ही अहंकार होता है। ऐसे में यह देवता टाइप्स गाने उन्हें खुद को भगवान और औरतों को अपनी दासी समझने का फ्री में ही मौका दे देते हैं। मामला घरेलू हिंसा से जुड़ा हुआ है, इसलिए अनायास ही यह गाना याद आ गया।
महिलाएं कई तरह की हिंसा का शिकार होती हैं, लेकिन घरेलू हिंसा एक ऐसा मुद्दा है, जो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा। वडोदरा के एक एनजीओ ‘सहज’ ने एक सर्वे किया, जिसके नतीजों में सामने आया कि देश में हर तीसरी महिला अपने पति के हाथों पिटती है। रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार 27 फीसद महिलाओं ने कहा कि वह 15 साल की उम्र से ही हिंसा झेल रही हैं। हैरानी वाली बात यह है कि कई महिलाओं को अपने पतियों की पिटाई से कोई परेशानी भी नहीं है।
महिलाओं के साथ कोई हिंसा या किसी अन्य तरह की कोई दुर्घटना हो जाए, तो उन्हें सबसे पहली सलाह यही मिलती है कि उन्हें एक निश्चित समय के बाद घर से बाहर नहीं होना चाहिए। इतने बजे से पहले घर वापस आ जाना चाहिए, ताकि वह ‘सुरक्षित’ रहें, लेकिन घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएं तो अपने घर में ही अपने पतियों के हाथों पिटने को मजबूर हैं। उन पतियों के हाथों, जो खुद को पत्नी का ‘रक्षक’ मानते हैं और उन्हें हर परेशानी से बचा कर रखने के वादे करते हैं।



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